
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव ने कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “सुपर फ्लॉप प्रदर्शन” करार देते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को करारा जवाब दिया है।
“पुत्र मोह में धृतराष्ट्र बन गए हैं भूपेश”: अरुण साव
भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान साव ने कहा, “कांग्रेस अब सिर्फ शहजादों के लिए प्रदर्शन करती है। बाकी कार्यकर्ताओं और नेताओं की कोई क़ीमत नहीं बची है। एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामलों के बाद कांग्रेस में भूपेश बघेल की स्वीकार्यता खत्म होती जा रही है।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, “भूपेश बघेल पुत्र मोह में इस कदर डूबे हैं कि धृतराष्ट्र बन बैठे हैं। उन्हें अब यह भी गर्व है कि उनके बेटे की गिरफ्तारी के बाद ‘देश अब उसे जान गया है।’ क्या यही कारण गर्व का होना चाहिए?”
साव ने गिनाए शराब घोटाले से जुड़े आरोप
डिप्टी सीएम साव ने दावा किया कि ईडी की प्रेस विज्ञप्ति में चैतन्य बघेल पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा,
“चैतन्य को 16.70 करोड़ रुपये की आपराधिक आय (POC) मिली, जिसे उन्होंने अपनी रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश किया। इसके अलावा, वह 1000 करोड़ से ज्यादा के घोटाले को संचालित करने में भी शामिल थे।”
साव ने बताया कि चैतन्य बघेल ने ये पैसे तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस कोषाध्यक्ष को हस्तांतरित करने के लिए अनवर ढेबर समेत अन्य के साथ समन्वय किया।
“भ्रष्टाचारियों की रक्षा के लिए नाकेबंदी”: भाजपा का आरोप
साव ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी पार्टी ने भ्रष्टाचारियों की गिरफ्तारी के विरोध में आर्थिक नाकेबंदी कर आम जनता को परेशान करने की कोशिश की। “यह प्रदर्शन किसी भी सूरत में जनसमर्थन नहीं जुटा सका। प्रदेश की जनता, व्यापारी संगठन और श्रमिक संघों ने कांग्रेस की अराजकता का विरोध किया,” उन्होंने जोड़ा।
“भूपेश का मुखौटा उतर गया है”: हिंदुत्व को लेकर भी हमला
साव ने नंदकुमार बघेल के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा, “भूपेश बघेल कभी कहते थे कि वह अपने पिता की बातों से सहमत नहीं हैं। लेकिन आज वह उन्हीं के विचारों का समर्थन कर रहे हैं। उनका हिंदुत्व विरोधी चेहरा उजागर हो गया है।”
निष्कर्ष
अरुण साव के इन तीखे बयानों से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है, वहीं भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई मान रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बना रह सकता है।
