
रायपुर न्यूज़ धमाका – प्राचार्य पदोन्नति को लेकर हाई कोर्ट में अंतिम दौर की सुनवाई के बीच, शिक्षा विभाग में सक्रिय कुछ तथाकथित शिक्षक नेताओं ने पर्दे के पीछे सौदेबाजी शुरू कर दी है। अदालत के बाहर ये लोग खुद को ‘पहुंच वाला’ बताकर तबादले और पोस्टिंग की सेटिंग कराने की कोशिश में जुटे हैं।
क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार द्वारा तय किए गए प्राचार्य पदोन्नति नियमों को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
- पहले डिवीजन बेंच ने राज्य शासन के नियमों को सही ठहराते हुए स्थगन आदेश हटाया था।
- अब मामला सिंगल बेंच में याचिकाकर्ता नारायण प्रकाश तिवारी की याचिका पर अंतिम चरण में है।
- सोमवार को महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी सरकार की ओर से पक्ष रखेंगे।
संभावना है कि कोर्ट फैसला आरक्षित कर सकता है।
कोर्ट से पहले “सेटिंग”?
मामला कोर्ट में होने के बावजूद शिक्षक नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है।
इनमें से कई तथाकथित नेता उन शिक्षकों से संपर्क कर रहे हैं जिनकी प्राचार्य पद पर पोस्टिंग संभावित है।
- खुद को ‘अंदर से जुड़े’ बताकर तबादले की सेटिंग करने की पेशकश की जा रही है।
- हाई कोर्ट की सुनवाई का हवाला देकर भरोसा दिलाया जा रहा है कि वे सिस्टम में पकड़ रखते हैं।
सवाल उठते हैं:
शिक्षकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि—
- जब मामला अभी कोर्ट में लंबित है, तो इन नेताओं की सक्रियता की वजह क्या है?
- किस आधार पर वे पोस्टिंग से पहले ही सौदेबाजी कर रहे हैं?
- क्या वाकई इनमें कोई अधिकारिक हैसियत है या केवल भ्रम फैलाकर लाभ उठाने की कोशिश?
तबादला एक्सप्रेस की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, हाई कोर्ट से निर्णय आते ही शिक्षा विभाग में टी और ई संवर्ग के प्राचार्यों की पोस्टिंग शुरू होनी है।
इसी मौके को भुनाने के लिए ये शिक्षक नेता झांसे और भ्रम के जरिए उन शिक्षकों को निशाना बना रहे हैं जो स्थानांतरण या पसंदीदा पदस्थापना की इच्छा रखते हैं।
निष्कर्ष:
यह मामला केवल कानूनी नहीं, नैतिक और प्रशासनिक चुनौती भी है।
जहां एक ओर न्यायपालिका में मामला अंतिम पड़ाव पर है, वहीं दूसरी ओर विभाग के कुछ स्वयंभू बिचौलिए शिक्षक नेता व्यक्तिगत लाभ के लिए पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
सरकार और शिक्षा विभाग को चाहिए कि ऐसे तत्वों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।



