
जगदलपुर में अर्द्ध रात्रि पूजा, 12 बकरों की बलि के साथ राज परिवार ने किया कार्यक्रम
जगदलपुर न्यूज धमाका – बस्तर दशहरा की पारंपरिक और तांत्रिक रस्म निशा जात्रा का आयोजन अर्द्ध रात्रि को किया गया। इस दौरान बस्तर राज परिवार के सदस्य मां खमेश्वरी की पूजा कर बस्तर की खुशहाली की कामना करते हैं।
पूजा की विशेषताएँ
- पूजा अष्टमी के बाद मध्य रात्रि में निशा जात्रा मंदिर में संपन्न हुई।
- लगभग एक घंटे तक तांत्रिक पूजा चली।
- इस दौरान 12 बकरों की बलि दी गई और उनके सिरों को क्रमबद्ध रख दीप जलाया गया।
- मिट्टी के 12 पात्रों में रक्त डालकर तांत्रिक आराधना की जाती है।
पारंपरिक महत्व
- पूजा रियासत काल से चली आ रही परंपरा है और इसे राज परिवार के सदस्य स्वयं करते हैं।
- प्रधान पुजरी के अनुसार, यह परंपरा फैज साही से चली आ रही है और राजा प्रजा की खुशहाली एवं सुरक्षा के लिए तांत्रिक पूजा करते हैं।
- बस्तर दशहरा में यह साल में एक बार होने वाली अनूठी तंत्र-मंत्र पूजा है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोग
- राज परिवार के सदस्य कमल चंद्र भंजदेव ने बताया कि पूजा के दौरान दसहरा से जुड़े लोग और समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
- पूजा में विशेष मशाल की रोशनी में विधिपूर्वक अर्चना और बलि प्रथा का पालन किया गया।
