
11 जून 2026
दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) – ने एक ऐतिहासिक फैसले में न केवल राजधानी बल्कि देशभर के निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए चाइल्ड केयर लीव ( child care leave) का रास्ता खोल दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सरकारी शिक्षकों की तरह निजी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए विशेष अवकाश पाने के हकदार हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने एक शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि बच्चों की देखभाल और उनके हितों की रक्षा के उद्देश्य से दी जाने वाली चाइल्ड केयर लीव का लाभ केवल सरकारी शिक्षकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
निजी स्कूल शिक्षकों को बड़ी राहत: दिल्ली हाई कोर्ट ने चाइल्ड केयर लीव को बताया अधिकार
देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा है कि बच्चों की देखभाल के लिए मिलने वाली चाइल्ड केयर लीव (CCL) का लाभ केवल सरकारी शिक्षकों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि निजी स्कूलों के शिक्षक भी इसके हकदार हैं।
बच्चों की देखभाल हर अभिभावक की जिम्मेदारी
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बच्चों के हितों की रक्षा और उनकी उचित देखभाल सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। ऐसे में शिक्षकों को यह सुविधा देने से वंचित नहीं किया जा सकता।

एक शिक्षिका की याचिका पर आया फैसला
यह फैसला एक निजी स्कूल शिक्षिका द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सामने आया। अदालत ने माना कि निजी और सरकारी शिक्षकों के बीच इस मामले में भेदभाव उचित नहीं है।
महिला शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय खासतौर पर महिला शिक्षकों के लिए राहत लेकर आएगा। इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों और पेशेवर जीवन के बीच बेहतर संतुलन बना सकेंगी।
शिक्षा क्षेत्र में समान अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम
हाई कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत लाखों निजी स्कूल शिक्षकों के अधिकारों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह निर्णय भविष्य में निजी संस्थानों की अवकाश नीतियों पर भी असर डाल सकता है।



