
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित नवा रायपुर मंत्रालय एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है मंत्रालय में लागू किया गया नया रंग आधारित पहचान पत्र (ID कार्ड) सिस्टम, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान उनके गले में लटकने वाले फीते (lanyard) के रंग से की जा रही है।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, मंत्रालय में अब तीन रंगों के फीते होंगे:
- पीला फीता – शासकीय अधिकारी और कर्मचारी
- नीला फीता – अन्य विभागों से आए शासकीय कर्मचारी
- सफेद फीता – गैर-शासकीय व्यक्ति, ठेकेदार, अतिथि या रिटायर्ड अधिकारी
इसके साथ ही ID कार्ड में RFID टैग, QR कोड, और होलोग्राम जैसी आधुनिक तकनीक भी जोड़ी गई है।
कर्मचारी संगठनों ने किया विरोध
इस आदेश के खिलाफ राज्य के प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि यह व्यवस्था कर्मचारियों के बीच भेदभाव और हीन भावना को जन्म देगी।
कमल वर्मा, अध्यक्ष – अधिकारी कर्मचारी संघ:
“हम तकनीकी ID कार्ड का विरोध नहीं कर रहे, लेकिन रंगभेद वाले फीते का सख़्त विरोध करते हैं। इससे कर्मचारियों की गरिमा को ठेस पहुंचेगी।”
जय कुमार साहू, अध्यक्ष – संचालनालय कर्मचारी संघ:
“रंगों के आधार पर पद और वर्ग का निर्धारण कर्मचारियों को बाँट देगा। इससे सामाजिक और मानसिक विषमता बढ़ेगी।”
महेंद्र सिंह राजपूत, अध्यक्ष – मंत्रालयीन कर्मचारी संघ:
“पहले ही लिफ्ट और कैंटीन में भेदभाव है, अब गले में रंग-बिरंगे फीते डालकर पहचान का तमाशा बना दिया गया है। अगर आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन करेंगे।”
फीते बना रुतबे की पहचान?
सरकार की मंशा सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल और प्रभावशाली बनाने की है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में यह व्यवस्था ‘रंग के आधार पर पद का प्रदर्शन’ बनती जा रही है। मंत्रालय की गलियारों में अब लोग एक-दूसरे को फीते के रंग से आंकने लगे हैं।
सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर मजाक और कटाक्ष भी शुरू हो गया है। एक यूज़र ने लिखा –
“अब मंत्रालय नहीं, रैंप शो लगेगा – जिसमें पीले फीते वाले अफसर, नीले वाले उम्मीद में और सफेद फीते वाले गेट के बाहर!”
क्या है विकल्प?
कर्मचारी संगठनों की मांग है कि:
- सभी कर्मचारियों को एक जैसे फीते दिए जाएं
- ID कार्ड में ही तकनीकी विवरण छुपा रहे
- रंगभेद न किया जाए, जिससे कार्यस्थल पर सम्मान और समानता बनी रहे
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ सरकार की यह नई व्यवस्था सुरक्षा और नियंत्रण की दृष्टि से कारगर हो सकती है, लेकिन कर्मचारियों के आत्मसम्मान और सामाजिक माहौल पर इसका असर नकारात्मक माना जा रहा है। यदि सरकार ने इस आदेश में बदलाव नहीं किया, तो जल्द ही मंत्रालय एक चरणबद्ध आंदोलन का गवाह बन सकता है।




