
गरियाबंद न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर की भारोत्तोलक संध्या साहू ने आत्महत्या कर ली। ‘छुरा की गोल्डन गर्ल’ के नाम से मशहूर संध्या ने अपने घर के किचन में साड़ी से फंदा लगाकर जान दे दी। इस घटना से पूरा खेल जगत, शिक्षा क्षेत्र और स्थानीय समुदाय सदमे में है।
संध्या की मां ने सबसे पहले देखा शव
यह घटना सोमवार की बताई जा रही है। संध्या की मां जब स्नान करके लौटीं, तो उन्होंने बेटी को किचन में साड़ी के फंदे पर लटका हुआ देखा। शोर मचाने पर मोहल्ले के लोग मौके पर पहुंचे और उसे फंदे से नीचे उतारा गया। संध्या को तुरंत छुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौके पर पहुंची पुलिस, जांच जारी
सूचना मिलते ही छुरा पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। फॉरेंसिक टीम ने भी मौके से महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि संध्या ने यह कदम किस मानसिक अवस्था में उठाया, इसका पता लगाया जा रहा है।
खेल और पढ़ाई दोनों में थी अव्वल
संध्या साहू छुरा नगर के आवासपारा की रहने वाली थीं और कचना धुरवा महाविद्यालय में ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने भुवनेश्वर, कोलकाता, बीकानेर, रायपुर, बालोद और गरियाबंद में हुए राज्य एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और चार गोल्ड मेडल सहित कुल 6 पदक जीते थे। उनके शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें ‘छुरा की गोल्डन गर्ल’ कहा जाने लगा था।
पिता स्कूल बस ड्राइवर, परिवार पर टूटा दुख का पहाड़
संध्या एक मध्यमवर्गीय परिवार से थीं। उनके पिता स्कूल बस चालक हैं। बेटी की असमय मौत से पूरा परिवार शोकसंतप्त और सदमे में है। उनकी मां का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्थानीय लोगों ने की न्यायिक जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और खिलाड़ियों ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रशासन से गहन जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि इतनी प्रतिभाशाली और होनहार बेटी ने आखिर क्यों आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाया? क्या वह किसी मानसिक तनाव या सामाजिक दबाव में थी?
समाज के लिए चेतावनी है यह घटना
संध्या की आत्महत्या एक जागृति का क्षण है — यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं के आंतरिक संघर्षों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। प्रशासन, समाज और खेल संगठनों को अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।


