
अभनपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अभनपुर क्षेत्र स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, परसदा (सोंठ) से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें छात्र-छात्राएं अश्लील और रोमांटिक गानों पर रील बनाते नजर आ रहे हैं। यह घटना रविवार को स्कूल परिसर में हुई, जिससे शिक्षा व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
फूहड़ गानों पर रील, सोशल मीडिया पर वायरल
वायरल वीडियो में कुछ छात्र-छात्राएं ‘शुरू हो जातिस मया के कहानी’ और ‘जीना हे त पीना हे’ जैसे गानों पर नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर पोस्ट होते ही वायरल हो गया और प्रशासन के संज्ञान में आया।
इस घटना को लेकर ग्रामीण क्षेत्र में काफी नाराजगी है, वहीं स्कूल की छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
स्कूल प्रबंधन की सफाई
विद्यालय के प्राचार्य हरिशंकर साहू ने बताया कि वीडियो रविवार को शूट किया गया, जिस दिन विद्यालय में छुट्टी थी। हालांकि, उसी दिन स्कूल में प्लंबिंग का कार्य चल रहा था और परिसर खुला था। उन्होंने कहा कि जैसे ही वीडियो सामने आया, छात्रों को बुलाकर माफीनामा लिखवाया गया और भविष्य में इस प्रकार की गतिविधि न दोहराने की चेतावनी दी गई।
DEO ने दिए जांच के आदेश
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. विजय खंडेलवाल ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा:
“यह कृत्य अस्वीकार्य है। स्कूल परिसर में रील बनाना अनुशासनहीनता है। इसकी जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
उठते सवाल: शिक्षा या सोशल मीडिया प्रदर्शन?
इस घटना ने कई सवालों को जन्म दिया है:
- क्या स्कूल प्रशासन छात्रों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रख रहा?
- क्या छुट्टी के दिन भी परिसर में कोई नियंत्रण व्यवस्था होनी चाहिए?
- सोशल मीडिया पर रील बनाने की लत बच्चों की पढ़ाई और नैतिकता को किस हद तक प्रभावित कर रही है?
- क्या स्कूल प्रबंधन की भूमिका सिर्फ माफीनामा लेकर खत्म हो जाती है?
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब अभनपुर क्षेत्र से इस तरह की खबर आई हो। कुछ समय पहले योग दिवस के मौके पर एक स्कूल में प्रधानपाठक द्वारा ‘जीना हे त पीना हे’ गाने पर योग कराते हुए वीडियो वायरल हुआ था, जिस पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई थीं।
विशेषज्ञों की राय: सोशल मीडिया का असर खतरनाक
शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों में रील्स बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति शिक्षा के मूल उद्देश्यों को पीछे छोड़ रही है। स्कूलों में सोशल मीडिया नीति की सख्ती से जरूरत बताई जा रही है। यदि समय रहते कड़ा नियंत्रण नहीं किया गया, तो शैक्षिक वातावरण बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
आगे की कार्रवाई पर नजर
डीईओ कार्यालय द्वारा जांच का आदेश दे दिया गया है। अब यह देखना अहम होगा कि:
- क्या दोषी छात्रों पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है?
- स्कूल प्रशासन के खिलाफ कोई जवाबदेही तय की जाती है?
- क्या इस मामले से सबक लेकर भविष्य में स्कूलों में सोशल मीडिया गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए सख्त गाइडलाइन तैयार की जाएगी?
निष्कर्ष:
विद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि नैतिकता और अनुशासन की पाठशाला होते हैं। ऐसे में यदि रील्स और वायरल कंटेंट स्कूल परिसर में जगह बनाने लगे, तो यह एक चिंताजनक संकेत है। समय रहते यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ‘शिक्षा का मंदिर’ धीरे-धीरे ‘सोशल मीडिया का मंच’ बन सकता है।



