
25 अगस्त 2026 //
रायपुर न्यूज़ धमाका – कांगेर घाटी में NH-30 के 6.010 किमी हिस्से के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज हुई। 8.386 हेक्टेयर वन भूमि की अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया
बस्तर में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से गुजरने वाले NH-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की प्रक्रिया अब अंतिम वन स्वीकृति की ओर बढ़ गई है। परियोजना के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। अब दूसरे चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
यह सड़क परियोजना जगदलपुर-सुकमा-कोंटा मार्ग के अंतर्गत NH-30 के किलोमीटर 25.530 से 31.540 तक प्रस्तावित है। सड़क के उन्नयन से बस्तर के दक्षिणी हिस्से में आवागमन को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने की उम्मीद है।
पहले चरण की मंजूरी के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, नागपुर ने 13 अक्टूबर 2025 को परियोजना को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी। इसके बाद स्वीकृति में निर्धारित वन एवं पर्यावरण संबंधी शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू हुई। 23 जून 2026 को प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध) ने शर्तों के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 8 जुलाई 2026 को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय के उप कार्यालय को पत्र भेजकर द्वितीय चरण की मंजूरी देने का अनुरोध किया। वहीं 10 जुलाई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के कार्यालय से भी आगे की कार्रवाई की गई।
क्षतिपूरक वनीकरण की राशि जमा
परियोजना के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले निर्धारित क्षतिपूरक वनीकरण और अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की राशि जमा की जा चुकी है। यह भुगतान वित्तीय वर्ष 2025-26 की निर्धारित दरों के आधार पर किया गया है। अंतिम मंजूरी तक राशि में कोई अंतर होने पर उसे लागू दर के अनुसार जमा करने का प्रावधान रखा गया है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के मुताबिक अंतिम वन स्वीकृति से पहले परियोजना एजेंसी आवश्यक संसाधन जुटाने और अनुमत प्रारंभिक गतिविधियां कर सकती है। हालांकि सड़क की ब्लैक टॉपिंग समेत स्थायी निर्माण कार्य अंतिम वन स्वीकृति मिलने के बाद ही शुरू किए जा सकेंगे।
विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की प्रमुख प्राकृतिक धरोहरों में शामिल है और जैव-विविधता की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में सड़क परियोजना को आगे बढ़ाते हुए वन, वन्यजीव और पर्यावरण से जुड़े नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकार का कहना है कि बस्तर में बेहतर सड़क और आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन विकास के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा और जैव-विविधता को सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पर्यटन और कारोबार को मिलेगा फायदा
NH-30 जगदलपुर को सुकमा और कोंटा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। संबंधित हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के बाद स्थानीय लोगों के साथ इस मार्ग से आवाजाही करने वाले यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से दूरस्थ इलाकों में प्रशासनिक पहुंच मजबूत होने के साथ पर्यटन, स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। कांगेर घाटी सहित बस्तर के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटन क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।
केदार कश्यप बोले- विकास के साथ प्रकृति की सुरक्षा जरूरी
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर के समग्र विकास के लिए बेहतर सड़क संपर्क बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांगेर घाटी क्षेत्र में NH-30 के इस हिस्से का चौड़ीकरण और मजबूतीकरण सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय प्रावधानों का पालन करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर की विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय से आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। श्री कश्यप ने कहा कि सड़क का उन्नयन होने से लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिलेगा, लेकिन कांगेर घाटी बस्तर और छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर है। इसलिए सड़क निर्माण के साथ वन, वन्यजीव और जैव-विविधता का संरक्षण भी सर्वोच्च प्राथमिकता में रहेगा।
अंतिम मंजूरी के बाद तेज होगा काम
प्रथम चरण में तय शर्तों का अनुपालन पूरा होने के बाद अब परियोजना की द्वितीय चरण की अंतिम वन स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद NH-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम पूरी तरह आगे बढ़ सकेगा। इस परियोजना के पूरा होने से बस्तर की सड़क अधोसंरचना को मजबूती मिलने के साथ कांगेर घाटी क्षेत्र में बेहतर और सुरक्षित कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।



