
नगरी न्यूज धमाका – देश के आदिवासी बहुल राज्यों से आए सेवानिवृत्त अधिकारियों और समाजसेवियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की। इस प्रतिनिधिमंडल में छत्तीसगढ़ सहित उड़ीसा, असम, आंध्रप्रदेश, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और पश्चिम बंगाल के गणमान्य आदिवासी प्रतिनिधि शामिल थे।
इस अवसर पर जनजाति कार्य मंत्री जुएल उरांव, ऊर्जा एवं नगरीय प्रशासन मंत्री मनोहर लाल खट्टर, जनजाति कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भेंटवार्ता के दौरान ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’, ‘पीएम जनमन योजना’ और ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आदिवासी समाज की प्रगति के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के जरिए 20 लाख से अधिक आदिवासी सरकारी अधिकारियों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित कर लगभग 1 लाख जनजातीय बहुल गांवों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने का लक्ष्य है।
छत्तीसगढ़ के परिप्रेक्ष्य में चर्चा करते हुए विकास मरकाम ने कहा कि राज्य की 32% आबादी आदिवासी है और पहली बार आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने से समाज में नई ऊर्जा और गर्व का संचार हुआ है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी गर्व जताया कि छत्तीसगढ़ को पहली बार आदिवासी मुख्यमंत्री के रूप में विष्णुदेव साय मिले हैं, जो लोकतंत्र में हाशिए के समुदायों की मुख्यधारा में भागीदारी का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आदिवासी समाज को यह विश्वास दिलाया है कि उनका उत्थान कोई उपकार नहीं बल्कि सामाजिक न्याय है। इस दौरान उन्होंने ‘जनजाति गौरव दिवस’ घोषित करने के लिए राष्ट्रपति मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी जताया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख चेहरे
छत्तीसगढ़ से आए प्रतिनिधिमंडल में विधायक व आईएएस नीलकंठ टेकाम, आईएएस शिशुपाल शोरी, आईपीएस राधेश्याम नायक, आईपीएस भारत सिंह, सेवानिवृत्त सहायक श्रम आयुक्त उमेश कच्छप, सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर फूलसिंह नेताम, कांकेर जिला पंचायत अध्यक्ष किरण नरेटी, और भाजपा अजजा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य विद्या सिदार प्रमुख रूप से शामिल रहे।



