
बालोद न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक बुजुर्ग की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। मृतक की बहू और उसके प्रेमी ने मिलकर सुनियोजित तरीके से उसे बिजली करंट देकर मौत के घाट उतार दिया। हत्या को दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस की सूझबूझ और वैज्ञानिक जांच से मामला सुलझ गया।
कैसे हुई वारदात?
घटना डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के ग्राम खड़ेनाडीह की है, जहां 17 जुलाई की सुबह 60 वर्षीय मनोहर निर्मलकर की मृत्यु की सूचना पुलिस को मिली थी। पहले तो इसे सामान्य मौत या साइकिल दुर्घटना बताया गया, लेकिन ग्राम बड़गांव निवासी भानूराम निर्मलकर ने मृतक की मौत को संदिग्ध बताते हुए पुलिस को सूचना दी।
जांच में पता चला कि 16 जुलाई की रात करीब 11 बजे, जब मनोहर परछी में सो रहा था, तभी उसकी बहू गीता निर्मलकर और सहयोगी लेखराम निषाद (बड़गांव निवासी) ने मिलकर हत्या को अंजाम दिया।
प्लानिंग से हत्या, हादसा दिखाने की कोशिश
लेखराम ने अपने घर से बिजली वायर, प्लग और प्लास्टिक के ग्लव्स लेकर आया। गीता ने लोहे का सब्बल लेकर निगरानी की। जैसे ही मनोहर गहरी नींद में गया, लेखराम ने करंट देकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद गीता ने शव को हल्दी, तेल और गुलाल से सजाया ताकि यह प्रतीत हो कि मौत किसी धार्मिक अनुष्ठान या दुर्घटना का हिस्सा थी।
बहू ने किया जुर्म कबूल
टीआई मुकेश सिंह की टीम मौके पर पहुंची और शव के गाल, गले, चेहरे पर जलने के निशान देखे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण बिजली करंट बताया गया। कड़ाई से पूछताछ पर गीता निर्मलकर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि ससुर अक्सर शराब के नशे में गाली-गलौज करता था और उस पर बुरी नजर रखता था, जिससे परेशान होकर उसने यह कदम उठाया।
सबूत और गिरफ्तारी
पुलिस ने गीता के घर से सब्बल, गमछा, जबकि लेखराम के घर से प्लास्टिक ग्लव्स, वायर, प्लग, साइकिल और मोबाइल फोन जब्त किया। ठोस साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
पुलिस का बयान:
“यह एक सोची-समझी और योजनाबद्ध हत्या थी। महिला के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जब्त सामान से आरोप सिद्ध हुए हैं। मामले में चार्जशीट तैयार की जा रही है।”
— टीआई मुकेश सिंह, डौंडीलोहारा थाना
संपादकीय टिप्पणी:
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि घरेलू हिंसा, मनोवैज्ञानिक दबाव और व्यक्तिगत दुश्मनी कभी-कभी कितनी घातक रूप ले सकती है। ऐसे मामलों में सामाजिक जागरूकता, समय पर हस्तक्षेप और संवाद अत्यंत आवश्यक है ताकि रिश्तों में पनप रही कटुता अपराध में न बदल जाए।



