
बलरामपुर न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। जिले के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ शिक्षक बेसिक इंग्लिश तक नहीं जानते और हैरानी की बात यह है कि उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी (D.E.O) का नाम तक नहीं पता।
इंग्लिश में ‘इलेवन’ तक नहीं लिख पाए शिक्षक
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में बलरामपुर के कुसमी ब्लॉक के मड़वा ग्राम पंचायत अंतर्गत घोड़ासोत गांव के प्राइमरी स्कूल के शिक्षक को कक्षा में पढ़ाते वक्त देखा जा सकता है। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति जब शिक्षक से ब्लैकबोर्ड पर “Eleven” और “Nineteen” लिखने को कहता है, तो शिक्षक लिख ही नहीं पाते।
यह स्थिति देख देशभर के सोशल मीडिया यूजर्स ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
हेड मास्टर को नहीं पता डीईओ और कलेक्टर का नाम
विडियो में आगे यह भी सामने आता है कि स्कूल के हेड मास्टर से जब कलेक्टर और डीईओ का नाम पूछा गया, तो वह जवाब नहीं दे पाए। यह घटना न केवल स्कूल की दशा, बल्कि शिक्षकों की योग्यता और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
60 बच्चों वाला स्कूल, जिम्मेदार मौन
यह मामला उस स्कूल का है जहां करीब 60 बच्चों का पंजीयन दर्ज है। लेकिन शिक्षक की शिक्षा और जागरूकता का स्तर देखकर यह साफ है कि बच्चों की भविष्य की बुनियाद ही कमजोर पड़ रही है। इस घटना के सामने आने के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी डीएन मिश्रा की मौन प्रतिक्रिया चिंता बढ़ा रही है।
हालांकि डीईओ ने जांच कराने की बात कही है, लेकिन जवाबदेही से बचने की कोशिश स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।
शिक्षा के दावों की खुली पोल
राज्य सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधार और डिजिटल एजुकेशन के दावे कर रही हो, लेकिन ग्रामीण इलाकों की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो पूरे शिक्षा तंत्र की पोल खोल रहा है।
जनता का सवाल: क्या ऐसे शिक्षकों के हाथों सुरक्षित है बच्चों का भविष्य?
देशभर के यूजर्स यह सवाल कर रहे हैं कि अगर शिक्षक को खुद बुनियादी अंग्रेजी और प्रशासनिक जानकारी नहीं है, तो वह बच्चों को क्या और कैसे सिखा पाएंगे? अब देखना होगा कि इस शर्मनाक लापरवाही पर सरकार और शिक्षा विभाग क्या कदम उठाते हैं।



