
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के धमतरी ज़िले में वर्ष 2021 में हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपी महेश कुमार वर्मा को हाईकोर्ट बिलासपुर से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने माना कि आरोपी घटना के समय मानसिक रूप से अस्वस्थ था, इसलिए उसे हत्या के गंभीर आरोपों से बरी कर दिया गया है।
मानसिक स्थिति को मिला कानूनी आधार
यह पूरा मामला धमतरी के करेलीबाड़ी क्षेत्र का है, जहाँ महेश ने अपने पिता पन्नालाल वर्मा और दादी त्रिवेणी वर्मा की हत्या कर दी थी। घटना के समय आरोपी का व्यवहार असामान्य था। उसने खुद को हनुमानजी, बजरंगबली और दुर्गा बताते हुए हिंसक व्यवहार किया।
परिजनों ने बताया कि महेश मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं था और रायपुर मानसिक चिकित्सालय में डेढ़ वर्ष से इलाजरत था।
पुलिस जांच में रही खामियाँ
हाईकोर्ट की सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस ने आरोपी की मानसिक स्थिति की जांच नहीं कराई और न ही मानसिक इलाज से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश किए।
मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच ने यह माना कि घटना के समय महेश अपने कृत्य की प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ था। इसलिए भारतीय न्याय संहिता की धारा 22 (पूर्व में IPC की धारा 84) के तहत उसे दोषमुक्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी पूरी तरह मानसिक रूप से स्थिर था। ऐसे में ‘संदेह का लाभ’ आरोपी को दिया गया।
जेल से रिहा, निजी मुचलका भी तय
कोर्ट ने आदेश दिया कि महेश कुमार वर्मा को जेल से रिहा किया जाए। साथ ही ₹25,000 के निजी मुचलके पर उसकी रिहाई को मंज़ूरी दी गई है।
निष्कर्ष
यह मामला न केवल मानसिक स्वास्थ्य और कानून के बीच संतुलन को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अपराध की न्यायिक समीक्षा में मानसिक अस्वस्थता को गंभीर कारक के रूप में देखा जाना चाहिए। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।



