दुर्ग न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के दुर्ग में मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार दो कैथोलिक ननों – प्रीति मैरी, वंदना फ्रांसिस – और एक अन्य महिला सुखमन मंडावी की जमानत याचिका पर दुर्ग कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि यह मामला नवगठित विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है।
कोर्ट ने लौटाया आवेदन, बिलासपुर भेजा मामला
जमानत की पैरवी कर रहे अधिवक्ता राजकुमार तिवारी ने बताया कि इससे पहले प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट ने याचिका खारिज की थी। अब दुर्ग कोर्ट ने भी नए नियमों का हवाला देते हुए मामला सुनने से इनकार किया और कहा कि यह मामला बिलासपुर की विशेष अदालत में सुना जाएगा। अदालत ने याचिका लौटा दी है।
दुर्ग कोर्ट परिसर में भारी भीड़, पुलिस बल तैनात
गुरुवार को दुर्ग कोर्ट परिसर में भारी गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल रहा।
एक ओर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता कोर्ट के बाहर विरोध में जुटे थे, तो दूसरी ओर ईसाई समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में समर्थन में उपस्थित थे।
स्थिति को देखते हुए पुलिस बल को तैनात किया गया। बाद में कोर्ट के फैसले के बाद सभी शांतिपूर्वक लौट गए।
आरोप – दो लड़कियों को आगरा ले जाकर धर्मांतरण का प्रयास
मामले की शिकायत बजरंग दल के रवि निगम द्वारा की गई थी। आरोप है कि दो आदिवासी बालिकाओं को आगरा ले जाकर उनका जबरन धर्मांतरण कराया जाना था।
इस मामले में दुहनिया डिंगौरी की प्रीति मैरी, सिविल लाइन आगरा की वंदना फ्रांसिस और नारायणपुर की सुखमन मंडावी को गिरफ्तार किया गया है। घटना स्थल पर भारी हंगामा और पुलिस हस्तक्षेप के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, और केसी वेणुगोपाल ने छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार पर धर्म विशेष को टारगेट करने का आरोप लगाया है।
राहुल गांधी ने संसद के बाहर बयान दिया कि “सेवा में लगे लोगों को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।”
पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात ने भी ननों से मुलाकात की और पुलिस पर आरोप लगाया कि “लड़कियों को धमकाया और पीटा गया।” उन्होंने कहा कि जब उन्होंने हस्तक्षेप किया तो एक लड़की रोने लगी और घर लौटने की इच्छा जताई।
सरकार का पलटवार: धर्मांतरण को लेकर कोई रियायत नहीं
वहीं भाजपा सांसद विजय बघेल ने लोकसभा में मामला उठाते हुए कहा कि “भोली-भाली आदिवासी लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाया जा रहा था। सतर्क नागरिकों ने समय रहते रोक लिया।”
उन्होंने विपक्ष पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि “देश में ऐसे हालात बनाए जा रहे हैं कि सच बोलना मुश्किल हो गया है।”
निष्कर्ष:
इस मामले ने धर्म, राजनीति और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों को एक साथ सामने ला खड़ा किया है। कानूनी कार्यवाही अब विशेष न्यायालय में होगी, जहां यह तय होगा कि आरोप सच हैं या साजिश।
फिलहाल, समाज और प्रशासन दोनों के लिए यह सतर्कता और संवेदनशीलता का समय है।



