
रायपुर न्यूज धमाका – रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में सोमवार को आयोजित कांग्रेस की किसान-जवान-संविधान सभा ने जहां संगठन की ताकत दिखाने का मंच तैयार किया था, वहीं कार्यक्रम में हुई गुटबाजी और अव्यवस्था ने पार्टी की आंतरिक एकता पर सवाल खड़े कर दिए। बारिश की बूंदाबांदी के बीच कांग्रेस की यह सभा राजनीतिक संदेश देने की बजाय अंतर्कलह की तस्वीर बनकर रह गई।
बरसात और बेमौसम बवाल
सभा के दौरान हल्की बारिश ने जहां व्यवस्था को प्रभावित किया, वहीं भीतरूनी गुटबाजी की ‘राजनीतिक बारिश’ ने माहौल को पूरी तरह विभाजित कर दिया। एक गुट के कार्यकर्ता इतने उग्र हो गए कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत को बोलने से रोकने की कोशिश की। महंत बार-बार मंच से शांत रहने की अपील करते रहे, लेकिन कार्यकर्ता मानने को तैयार नहीं थे।
खड़गे की फटकार
स्थिति तब और असहज हो गई जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को स्वयं मंच से नारेबाजों को टोकना पड़ा। उन्होंने कहा, “आप लोग ये उत्साह चुनाव के लिए बचाकर रखो और अभी चुप बैठो।” यह टिप्पणी इस बात का संकेत थी कि शीर्ष नेतृत्व भी कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता से परेशान है।
एयरपोर्ट से दिखा गुटीय तनाव
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव, खड़गे के एयरपोर्ट आगमन पर सहजता से मंच तक नहीं पहुंच सके। माना जा रहा है कि उनके गुट को कार्यक्रम के प्रबंधन से अलग-थलग रखने की कोशिश हुई। इसकी भरपाई सभा स्थल पर समर्थकों की नारेबाजी और उपस्थिति के ज़रिए की गई।
देवेंद्र यादव समर्थकों की हावी उपस्थिति
नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ता अधिकतर भिलाई क्षेत्र से थे, जिन्हें देवेंद्र यादव समर्थक माना जा रहा है। यादव, जो खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं, उनकी सक्रियता और दिल्ली दौरों को लेकर वर्तमान पीसीसी चीफ दीपक बैज ने पहले ही नाराज़गी जताई थी। यह गुटीय संघर्ष अब खुलकर सार्वजनिक मंचों पर दिखने लगा है।
जोश में दिखे भूपेश, मुद्दे उठाए सधे अंदाज़ में
जब मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बोले, तो उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर जमकर आक्रामक तेवर दिखाए। किसानों को खाद नहीं मिलने और स्कूलों में किताबों की कमी जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए उन्होंने सरकार पर निशाना साधा। आश्चर्यजनक रूप से उनके भाषण के दौरान कोई नारेबाजी या व्यवधान नहीं हुआ, जिससे स्पष्ट होता है कि उनके समर्थकों ने कार्यक्रम को गंभीरता से लिया।
क्या हासिल हुआ कांग्रेस को?
हालाँकि बारिश के बावजूद कार्यकर्ताओं की अच्छी मौजूदगी पार्टी के जमीनी संगठन को दर्शाती है, लेकिन गुटबाजी की खुली तस्वीर ने इस उपलब्धि को फीका कर दिया। जनता और कार्यकर्ता दोनों के बीच यह सवाल उभरता है कि क्या कांग्रेस आंतरिक एकता के बिना आगामी चुनावों में सशक्त प्रदर्शन कर पाएगी?
निष्कर्ष
साइंस कॉलेज मैदान की सभा कांग्रेस के लिए एक अवसर थी—अपने मुद्दे रखने का, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने का और विपक्ष पर हमलावर होने का। लेकिन बारिश की फुहारों के साथ गुटबाजी के छींटों ने यह संदेश दिया कि पार्टी को सबसे पहले अपने घर को संभालने की ज़रूरत है। अगर जल्द सामंजस्य नहीं बना, तो आने वाले चुनावों में यह अंतरकलह एक बड़ा राजनीतिक जोखिम साबित हो सकती है।



