

दंतेवाड़ा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को “सुशासन तिहार” के तहत दंतेवाड़ा जिले के सुदूर और अंतिम छोर पर बसे आदिवासी गांव मुलेर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांव के इमली के पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन का जायजा लिया।
गांव में हुआ पारंपरिक स्वागत
मुख्यमंत्री का महुआ, आमपत्ती से बने पारंपरिक हार और गौर मुकुट से पारंपरिक स्वागत किया गया। स्थानीय संस्कृति की झलक इस आयोजन में स्पष्ट रूप से देखने को मिली। मुख्य सचिव अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह भी इस दौरे में मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित रहे। इन अधिकारियों का स्वागत ग्रामीणों ने छिंद पत्तों से बने गुलदस्तों से किया।
जन संवाद से निकले ज़मीनी फीडबैक
मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों से सीधे संवाद करते हुए पूछा कि क्या योजनाओं का लाभ सही पात्रों तक पहुँच रहा है। ग्रामीणों ने राशन वितरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़कों से जुड़ी कुछ समस्याएं रखीं, जिन पर मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।
आंगनबाड़ी और PDS की हुई समीक्षा
CM साय ने ग्राम मुलेर के आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया, बच्चों से मुलाकात कर उन्हें चॉकलेट भी वितरित की। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की स्थिति का भी मूल्यांकन किया और ग्रामीणों से पारदर्शिता और नियमितता की जानकारी प्राप्त की।
सुशासन तिहार: संवाद और निगरानी की नई पहल
मुख्यमंत्री ने कहा,
“सुशासन तिहार महज कोई औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता से सीधे जुड़ने और योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास है। जब तक योजनाएं ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं होतीं, तब तक उनका कोई अर्थ नहीं।“
स्थानीय मांगों पर गंभीरता से विचार का आश्वासन
दौरे के अंत में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों और समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और उन्हें राज्य स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।



