
बेमेतरा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में गरीब बच्चों के लिए लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का दुरुपयोग करने के आरोप में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी प्रवीण सिंह राजपूत को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने अपनी पुत्री का प्राइवेट स्कूल में मुफ्त प्रवेश दिलाने के लिए फर्जी अंत्योदय कार्ड बनवाया था।
क्या है मामला?
बेमेतरा निवासी आशुतोष पांडेय ने कलेक्टर को शिकायत कर आरोप लगाया था कि:
- प्रवीण सिंह राजपूत, जो DEO कार्यालय में पदस्थ हैं, ने अपनी बेटी शैलश्री सिंह को एलेन पब्लिक स्कूल और अकेडमिक वर्ल्ड स्कूल में शिक्षा सत्र 2024-25 और 2025-26 के लिए आरटीई के तहत दाखिला दिलवाया।
- इसके लिए उन्होंने अपनी मां रचना राजपूत के नाम पर अंत्योदय कार्ड बनवाया, जिसमें स्वयं को पुत्र और पत्नी को बहू दिखाया गया।
- शिकायत के साथ दस्तावेज और राशन कार्ड की प्रतियां भी प्रस्तुत की गई थीं।
फर्जीवाड़ा उजागर, तत्काल निलंबन
जांच में दोषी पाए जाने पर:
- प्रवीण सिंह राजपूत को छग सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1)(2)(3) के उल्लंघन के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
- निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, नवागढ़ नियत किया गया है।
- उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा।
जांच के लिए दो समितियाँ गठित
DEO डॉ. कमल कपूर द्वारा जिले के सभी निजी स्कूलों में RTE के तहत चयनित विद्यार्थियों की दस्तावेज़ जांच के लिए दो जांच समितियाँ गठित की गई हैं:
समिति-1 (साजा एवं बेरला ब्लॉक):
- लोकनाथ बांधे (BEO नवागढ़)
- एसएस ठाकुर (प्राचार्य, स्वामी आत्मानंद स्कूल कुसमी)
- गजानंद सिंह ठाकुर (सहायक BEO बेमेतरा)
समिति-2 (बेमेतरा एवं नवागढ़ ब्लॉक):
- जयप्रकाश करमाकर (BEO बेरला)
- एसपी कोशले (प्राचार्य, शासकीय स्कूल अछोली)
- कामिनी महिलांग (सहायक BEO)
इन समितियों को 7 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपनी है।
बड़ी संख्या में फर्जी एडमिशन की आशंका
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरटीई पोर्टल पर संलग्न अंत्योदय और बीपीएल कार्डों की प्रमाणिकता संदेह के घेरे में है। अगर जांच में और फर्जी मामलों का खुलासा होता है, तो कई अन्य कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
RTE का उद्देश्य और दुरुपयोग
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। लेकिन सरकारी तंत्र में बैठे कुछ लोग फायदे के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे असली जरूरतमंद वंचित रह जाते हैं।
