
बिलासपुर न्यूज धमाका – महाराष्ट्र के मालेगांव में वर्ष 2008 में हुए बम विस्फोट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी प्रज्ञा की बहन उपमा सिंह, जो वर्तमान में बिलासपुर के निजी दौरे पर हैं, ने कहा –
“हिंदुत्व की जीत हुई है, सत्य की जीत हुई है और असत्य की हार हुई है।”
उन्होंने साध्वी प्रज्ञा को “शेरनी” बताते हुए अदालत के निर्णय को न्यायपालिका की निष्पक्षता का उदाहरण बताया।
क्या कहा अदालत ने?
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि घटना स्थल पर विस्फोट हुआ था, यह तो सिद्ध हुआ, लेकिन यह सिद्ध नहीं हो सका कि बम उसी मोटरसाइकिल में रखा गया था जिससे आरोपियों को जोड़ा गया।
इसके अतिरिक्त, मेडिकल रिपोर्ट में कई विसंगतियाँ पाई गईं। अदालत ने यह भी कहा कि कई प्रमुख गवाह अपने बयान से पलट गए, जिससे अभियोजन का पक्ष कमजोर हुआ।
पूरा मामला क्या है?
- 29 सितंबर 2008: मालेगांव में एक शक्तिशाली बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत और 100 से अधिक घायल हो गए थे।
- अक्टूबर 2008: एटीएस ने साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार किया, फिर ले. कर्नल श्रीकांत पुरोहित को भी हिरासत में लिया गया।
- जनवरी 2009: एटीएस ने पहला आरोपपत्र दाखिल किया।
- 2011-2016: जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई।
- 2018: NIA ने सात आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद से जुड़े आरोप तय किए।
- 2023 तक: कुल 323 गवाहों की गवाही हुई, जिनमें से 40 गवाह मुकर गए।
- अप्रैल 2025: अंतिम बहस पूरी हुई और फैसला सुरक्षित रखा गया।
- 31 जुलाई 2025: अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस फैसले पर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
जहाँ हिंदू संगठनों ने इसे “हिंदुत्व की जीत” बताया, वहीं मानवाधिकार संगठनों ने न्याय प्रक्रिया में देर पर सवाल उठाए हैं।
निष्कर्ष
मालेगांव विस्फोट कांड भारतीय न्याय व्यवस्था में एक लंबा चला केस रहा है, जिसमें राजनीतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के अनेक पहलू जुड़े रहे। अदालत का यह निर्णय उन सभी के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो यह मानते हैं कि न्याय प्रक्रिया चाहे जितनी लंबी हो, सत्य की विजय अंततः होती है।



