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क्या टूथब्रश से बेहतर है नीम की दातून? जानिए इसके फायदे, नुकसान और इस्तेमाल का सही तरीका

20 अगस्त 2026 //

सेहत टिप्स – सुबह उठते ही ज्यादातर लोगों की शुरुआत टूथब्रश और टूथपेस्ट से होती है। हालांकि, भारतीय परंपरा में नीम की दातून का इस्तेमाल सदियों से दांतों और मसूड़ों की सफाई के लिए किया जाता रहा है। आज भी कई लोग इसके स्वाद, ताजगी और प्राकृतिक गुणों की वजह से इसे पसंद करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या नीम की दातून वास्तव में ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद है और क्या इसे रोजाना टूथब्रश की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है?आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।20

नीम की दातून क्यों मानी जाती है खास?

नीम की टहनियों में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होने की बात कही जाती है। दातून को चबाने और उससे दांतों की सतह साफ करने से मुंह में जमा कुछ प्लाक और खाद्य कण हटाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, दातून से मसूड़ों की हल्की मालिश भी होती है, जिससे मुंह में ताजगी महसूस हो सकती है।हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नीम में मौजूद प्राकृतिक गुणों का मतलब यह नहीं है कि दातून हर व्यक्ति के लिए टूथब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट का पूरी तरह बराबर विकल्प है।

क्या रोजाना नीम की दातून की जा सकती है?

अगर दातून साफ और सही तरीके से इस्तेमाल की जाए, तो कई लोग इसे अपनी दैनिक ओरल केयर का हिस्सा बना सकते हैं। इसके लिए ताजी, साफ और बिना फफूंद वाली नीम की पतली टहनी लेना बेहतर माना जाता है। एक सिरे को चबाकर रेशेदार बनाएं और उससे दांतों को धीरे-धीरे साफ करें। बहुत ज्यादा दबाव डालने या दातून को जोर से रगड़ने से मसूड़ों में चोट और दांतों की बाहरी परत को नुकसान पहुंच सकता है। दातून इस्तेमाल करने के बाद मुंह अच्छी तरह कुल्ला करना भी जरूरी है। एक ही टहनी को लंबे समय तक इस्तेमाल करने के बजाय स्वच्छ और ताजी दातून का प्रयोग करें।

क्या दातून टूथब्रश की जगह ले सकती है?

यहीं सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है। टूथब्रश और खासकर फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट का इस्तेमाल दांतों में कैविटी से बचाव के लिए अच्छी तरह स्थापित तरीका है। दातून से सफाई में मदद मिल सकती है, लेकिन यह दांतों की हर सतह और दांतों के बीच के हिस्सों की सफाई टूथब्रश की तरह प्रभावी ढंग से करे, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए दातून को पारंपरिक ओरल केयर के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे टूथब्रश और फ्लोराइड टूथपेस्ट का निश्चित विकल्प मानना सही नहीं होगा। दांतों के बीच की सफाई के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश की जरूरत भी पड़ सकती है।

सोशल मीडिया के नुस्खों से रहें सावधान

नीम की दातून को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते हैं, लेकिन हर घरेलू नुस्खा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं होता। दांतों में दर्द, लगातार मसूड़ों से खून आना, सूजन, बदबू या कैविटी जैसी समस्या होने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डेंटिस्ट से सलाह लेना बेहतर है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता
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