
कोरबा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल और कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत के बीच एक फेसबुक पोस्ट को लेकर सीधा टकराव सामने आया है।
पूर्व मंत्री अग्रवाल द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक फोटो पर कलेक्टर ने आपत्ति जताते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है और तत्काल पोस्ट को डिलीट करने का निर्देश दिया है।
मामला क्या है?
12 जुलाई को राज्यपाल रामेन डेका कोरबा प्रवास पर थे। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर उनसे मुलाकात करने पहुंचे। बातचीत के दौरान ननकीराम कंवर ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा। उसी समय की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें राज्यपाल और कलेक्टर बैठे हुए, जबकि पूर्व गृहमंत्री खड़े नजर आए।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए लिखा:
“छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता का अपमान बहुत ही कष्टप्रद है… यह जान और सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई।”
कलेक्टर की आपत्ति और कानूनी चेतावनी
कलेक्टर अजीत वसंत ने इस पोस्ट पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि:
“आपके द्वारा दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से यह पोस्ट की गई है, जो सामाजिक विद्वेष फैलाने और प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास है।”
उन्होंने पूर्व मंत्री को नोटिस जारी कर उक्त पोस्ट को तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं और चेताया है कि ऐसा नहीं करने पर उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव
जयसिंह अग्रवाल पहले भी IAS अधिकारियों के साथ तीखी नोंकझोंक और खुलेआम आलोचना के कारण चर्चा में रहे हैं। इस बार मामला संवेदनशील आदिवासी नेतृत्व और संवैधानिक पदधारियों के व्यवहार से जुड़ा हुआ है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
कलेक्टर का पक्ष:
- पोस्ट से शासकीय कार्य प्रणाली की छवि धूमिल हुई।
- सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
- कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल असर डालने की आशंका।
निष्कर्ष
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सार्वजनिक संवाद की मर्यादा और सीमाएँ फिर से परिभाषित होनी चाहिए?
यह टकराव केवल एक फेसबुक पोस्ट तक सीमित नहीं, बल्कि यह राज्य में राजनीतिक शिष्टाचार और प्रशासनिक गरिमा की समझदारी की भी परीक्षा है।



