

कोरबा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक रहस्यमयी और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 19 वर्षीय युवक का शव महुआ पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक ने रात में व्हाट्सएप स्टेटस पर लिखा था – “आखिरी बार देख लो”, जिसके कुछ ही घंटे बाद उसका शव खेत में संदिग्ध अवस्था में मिला।
घटना का विवरण
घटना कोरबा के ग्राम बोतली (वनांचल क्षेत्र) की है। मृतक की पहचान सांझी लाल राठिया, पिता रायसिंह राठिया (उम्र 19 वर्ष) के रूप में हुई है। शव घर से लगभग 200 मीटर दूर, उसी के खेत में महुआ पेड़ से लटका पाया गया। सूचना मिलते ही करतला थाना प्रभारी कृष्ण कुमार वर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
शव की स्थिति से हत्या की आशंका
शव की स्थिति ने पुलिस और ग्रामीणों को चौंका दिया। मृतक का दाहिना हाथ रस्सी से बंधा हुआ था, और वह रस्सी शरीर से होते हुए पेड़ की शाखा तक गई थी। यह आत्महत्या की सामान्य स्थिति से अलग लग रही थी, जिससे हत्या की आशंका भी गहराती जा रही है।
व्हाट्सएप स्टेटस बना रहस्य की कुंजी?
जांच के दौरान पुलिस को मृतक का मोबाइल फोन भी घटनास्थल से मिला। फोन की जांच में पता चला कि रात करीब 3:30 बजे उसने स्टेटस डाला था – “आखिरी बार देख लो”। इस स्टेटस को उसके कई दोस्तों ने देखा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसके जीवन का अंतिम संदेश होगा।
मां की मौत के बाद अकेले संभाल रहा था परिवार
जानकारी के मुताबिक, सांझी की मां का कुछ वर्ष पहले निधन हो गया था, और वह तब से परिवार और खेती-किसानी की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहा था। परिवार ने बताया कि वह रात में खाना खाकर सोने गया था, लेकिन सुबह वह गायब मिला और फिर शव बरामद हुआ।
जांच के लिए फॉरेंसिक और डॉग स्क्वॉड की मदद
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली है। मोबाइल के डिजिटल डेटा, संदिग्ध परिस्थितियों, और शव की रस्सी बंधी स्थिति को आधार बनाकर जांच कई एंगल से की जा रही है।
पुलिस का बयान
कोरबा सीएसपी भूषण एक्का ने बताया कि,
“घटना की जांच हर संभव एंगल से की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्य की जांच भी जारी है। हत्या या आत्महत्या — यह स्पष्ट करने के लिए हम सभी तथ्यों को खंगाल रहे हैं।”
क्या यह सुसाइड नोट था या SOS?
‘आखिरी बार देख लो’ — यह स्टेटस अब एक महत्वपूर्ण सुराग बन चुका है। क्या यह किसी गहरी मानसिक पीड़ा का संकेत था या किसी से अंतिम अपील? या फिर किसी ने उसे ऐसा लिखने को मजबूर किया?