
सक्ति न्यूज धमाका – जिले के ग्राम सरवानी में सोमवार की रात एक घर में गैस सिलेंडर ब्लास्ट के बाद भयानक आगजनी की घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। घटना में 9 लोग बुरी तरह झुलस गए, जिनमें 6 की हालत नाजुक है। स्थानीय प्रशासन और राहत तंत्र की विफलता इस हादसे में साफ नजर आई।
हादसे का क्रम: आग, धमाका और फिर चीख-पुकार
- हादसे के वक्त घर के मालिक यमुना शंकर और उनकी पत्नी प्रमिला साहू—जो “प्रमिला ब्यूटी पार्लर” चलाते हैं—सक्ति बाजार से सामान लेने गए हुए थे।
- घर में उनका 4 साल का बेटा सो रहा था।
- इसी दौरान शॉर्ट सर्किट से घर में आग लगी, जो तेजी से रसोई तक पहुंची और वहाँ रखा एलपीजी सिलेंडर फट गया।
- धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकान हिल गए, दीवारें ढह गईं, और इलेक्ट्रॉनिक सामान जलकर राख हो गया।

जिन्होंने बचाने की कोशिश की, वे खुद झुलस गए
आग की लपटें देखकर पड़ोसियों ने बिना देर किए बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन आग बुझाने की कोशिश में:
- पीतांबर साहू
- प्रतिभा साहू
- जिधन साहू
- दिगंबर साहू
- भवानी पटेल
- जम्मूलाल पटेल
- सहित अन्य 9 लोग झुलस गए।
इनमें से 6 की हालत नाजुक है और उन्हें रायगढ़ के निजी अस्पताल में रेफर किया गया है।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
- घटना के बाद दमकल वाहन समय पर नहीं पहुंचा।
- आग बुझाने के लिए जांजगीर जिले से एंबुलेंस बुलानी पड़ी, जो 2.5 घंटे बाद पहुंची।
- सवाल उठता है कि सक्ति जैसे नए जिले में आपातकालीन व्यवस्था आखिर है कहाँ?
- लाखों रुपये के जिला फंड का प्रयोग किसमें हो रहा है?
स्थानीय नागरिकों का गुस्सा
स्थानीय निवासियों ने घटना के बाद प्रशासन पर नाराजगी जताई और कहा:
“अगर सक्ती में दमकल होती, तो आग को शुरुआती समय में ही रोका जा सकता था। न एंबुलेंस, न दमकल—क्या यही विकास है?”
आर्थिक नुकसान और पुनर्वास
- साहू परिवार के घर का लगभग सारा सामान जल गया।
- अनुमानित लाखों रुपये का नुकसान।
- प्रशासन की ओर से कोई त्वरित मुआवजा घोषणा नहीं हुई है।
यह घटना सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता का सबूत है
जब एक नया जिला बनाए जाने के बाद भी आपात सेवाओं की पहुंच नहीं, तो ग्राम स्तर पर कितनी असुरक्षा होगी, यह सोचने का विषय है।



