
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार करते हुए उन्हें हाईकोर्ट से رجوع करने की सलाह दी है। दूसरी ओर, चैतन्य बघेल को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची शामिल थे, ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता CBI और ED की कार्रवाई या PMlA कानून की वैधता को चुनौती देना चाहते हैं, तो इसके लिए अलग याचिका दाखिल करनी होगी।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई करे। अगली सुनवाई की तारीख 6 अगस्त 2025 तय की गई है।
चैतन्य बघेल की रिमांड खत्म, भेजे गए जेल
चैतन्य बघेल को रिमांड समाप्त होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां 14 दिन की न्यायिक हिरासत में उन्हें जेल भेज दिया गया है। ईडी और सीबीआई की पूछताछ के बाद यह फैसला लिया गया।
राजनीतिक बयानबाज़ी तेज
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा:
“चोर के दाढ़ी में तिनका” की कहावत चरितार्थ हो रही है। अगर कुछ गलत नहीं किया है, तो सुप्रीम कोर्ट क्यों भाग रहे हैं? जांच एजेंसियां स्वतंत्र हैं और सबूतों के आधार पर काम कर रही हैं।
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने भी इस पूरे प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए जांच को उचित और निष्पक्ष बताया।
मामले की पृष्ठभूमि
- ईडी और सीबीआई छत्तीसगढ़ में वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही हैं।
- भूपेश बघेल और उनके बेटे का नाम आरोपियों की सूची में सामने आया है।
- याचिका में जांच एजेंसियों की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी गई थी।
सारांश:
- सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई से किया इनकार
- याचिकाकर्ताओं को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जाने की सलाह
- चैतन्य बघेल 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजे गए
- राजनीतिक बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप तेज



