
कांकेर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के विधायक आशाराम नेताम जब औचक निरीक्षण पर आंखिहर्रा गांव के शासकीय स्कूल पहुंचे, तो बच्चों से पूछे गए सामान्य सवालों के जवाब न मिलने पर वे हैरान रह गए। बच्चों को मुख्यमंत्री, कलेक्टर, यहाँ तक कि अपने स्कूल के प्रिंसिपल का नाम भी नहीं पता था।
बच्चों से पूछा नाम, कोई जवाब नहीं
निरीक्षण के दौरान विधायक ने कक्षा में मौजूद बच्चों से पहला सवाल किया— “क्या मुझे पहचानते हो?” इस पर कक्षा में सन्नाटा छा गया। किसी भी बच्चे ने विधायक का नाम तक नहीं बताया। इसके बाद विधायक ने पूछा— “आपके जिले के कलेक्टर कौन हैं?” लेकिन इस सवाल का भी जवाब किसी को नहीं आया।
विधायक ने जब प्रिंसिपल का नाम पूछा, तो वो भी बच्चों को नहीं पता था। इस स्थिति ने स्कूल की शैक्षणिक स्थिति की वास्तविकता को सामने ला दिया।
प्रिंसिपल को लगाई फटकार
स्थिति से नाराज विधायक नेताम ने मौके पर ही स्कूल के प्रिंसिपल को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अगर बच्चे इतने सामान्य सवालों के भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं तो यह साफ संकेत है कि शिक्षा की गुणवत्ता में गंभीर कमी है।
प्रिंसिपल ने अपनी सफाई में कई तर्क देने की कोशिश की, लेकिन विधायक ने कहा कि “बच्चों की बुनियादी जानकारी तक न होना शिक्षा प्रणाली की विफलता का परिचायक है।” उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
विधायक का बयान
विधायक आशाराम नेताम ने निरीक्षण के बाद मीडिया से कहा:
“राज्य सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जब बच्चे मुख्यमंत्री और अपने स्कूल प्रमुख का नाम भी नहीं जानते, तो यह सीधे तौर पर सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।“
उन्होंने कहा कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे इस विषय को विधानसभा में भी उठाएंगे।
क्या है असली वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी:
- शिक्षकों की अनुपस्थिति,
- कमजोर मॉनिटरिंग सिस्टम,
- बुनियादी सुविधाओं की कमी
जैसी समस्याएं गंभीर हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकारी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा सच में बच्चों को भविष्य के लिए तैयार कर रही है?
मुख्य बिंदु:
- विधायक आशाराम नेताम ने आंखिहर्रा स्कूल का किया औचक निरीक्षण
- बच्चे नहीं बता पाए मुख्यमंत्री, कलेक्टर और प्रिंसिपल का नाम
- विधायक ने प्रिंसिपल को लगाई फटकार
- शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
