
जशपुरनगर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में नागपंचमी के अवसर पर आयोजित सर्पदंश से बचाव कार्यशाला में न सिर्फ लोगों को जागरूक किया गया, बल्कि सांपों से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए रोचक सामग्री का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने लोगों से कहा कि सर्पदंश से डरने की नहीं, समझदारी से इलाज कराने की ज़रूरत है।
कार्यशाला में जुटे जनप्रतिनिधि, अफसर, सर्पमित्र और स्कूली बच्चे
वनमंडल जशपुर द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कलेक्टर रोहित व्यास, डीएफओ शशि कुमार, सर्प विशेषज्ञ, स्कूली छात्र और शिक्षा-स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
विधायक रायमुनी भगत ने दी सटीक सलाह: झाड़-फूंक नहीं, इलाज ज़रूरी
विधायक भगत ने कहा, “सांप प्रकृति के मित्र हैं। बारिश के मौसम में उनसे सावधानी रखना ज़रूरी है, लेकिन डरना नहीं है। सर्पदंश की स्थिति में देशी इलाज, झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के बजाय नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाएं, जहां एंटी-वेनम दवाइयां उपलब्ध हैं।”
उन्होंने वनोपज संग्रहण के दौरान सतर्कता बरतने और आश्रम/छात्रावासों में समय-समय पर साफ-सफाई पर ज़ोर दिया।
कलेक्टर ने कहा – जशपुर ‘नागलोक’, एंटी-वेनम दवाएं हैं उपलब्ध
कलेक्टर रोहित व्यास ने कहा कि “जशपुर को नागलोक कहा जाता है। यहां सांपों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। बरसात में सर्पदंश के मामले अधिक आते हैं, इसलिए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-वेनम दवाएं उपलब्ध करा दी गई हैं।” उन्होंने लोगों से अपील की कि बड़े अस्पतालों की प्रतीक्षा न करें, त्वरित इलाज ही जीवन बचा सकता है।
सर्प विशेषज्ञों ने दी जानकारी: कौन-से सांप ज़हरीले, कैसे पहचानें
कार्यशाला में सर्प विशेषज्ञ अजय शर्मा, राहुल तिवारी, अविनाश यादव, जितेंद्र थवाईत, रामनिवास गुप्ता और डॉ. सुनील लकड़ा ने सांपों की प्रजातियाँ, जहरीले और गैर-जहरीले सांपों की पहचान, सर्पदंश से बचाव और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। विभागों को आपात स्थिति में अपनाए जाने वाले “क्या करें, क्या न करें” निर्देश भी दिए गए।
‘सांपों की दुनिया’ पुस्तक, ब्रोशर और बच्चों के लिए सांप-सीढ़ी गेम का विमोचन
विधायक द्वारा इस मौके पर तीन जागरूकता सामग्री का विमोचन किया गया:
- ‘सांपों की दुनिया: मिथक और सत्य’ – एक किताब जिसमें सांपों से जुड़ी भ्रांतियाँ, वैज्ञानिक जानकारी और सुरक्षा उपाय दिए गए हैं।
- ब्रोशर – स्कूली बच्चों को सर्पदंश से बचाव की जानकारी देने हेतु।
- सांप-सीढ़ी खेल (सादरी भाषा में) – एक रोचक खेल जिसमें सही व्यवहार करने पर सीढ़ी और गलत कदमों पर सर्पदंश द्वारा नीचे गिरने की स्थिति दर्शाई गई है।
प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को मिला सम्मान
इस अवसर पर सर्पदंश जागरूकता पर चित्रकला एवं निबंध प्रतियोगिता में विजेता छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए गए:
चित्रकला प्रतियोगिता:
- प्रथम – उर्मिला यादव (कुनकुरी)
- द्वितीय – आकांक्षा कुमारी (बगीचा)
- तृतीय – श्रुति बघेल (जशपुर)
निबंध प्रतियोगिता:
- प्रथम – अर्पिता नागेश (मनोरा)
- द्वितीय – रिया भगत (फरसाबहार)
- तृतीय – सामदेव पैंकरा (कांसाबेल)
निष्कर्ष: ज्ञान और सावधानी से सर्पदंश पर विजय संभव
कार्यशाला में शामिल सभी वक्ताओं और विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि सांपों को मारना नहीं, समझना ज़रूरी है। सर्पदंश से मौतें अज्ञानता और समय पर इलाज न मिलने से होती हैं, जिन्हें सही जानकारी और व्यवहार से रोका जा सकता है।



