
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने शासन और प्रशासन को सख्त संदेश देते हुए कहा है—”संसाधन नहीं, तो काम नहीं।”
राज्यभर में कार्यरत कनिष्ठ राजस्व अधिकारियों ने 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आगामी 28 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्या हैं प्रमुख समस्याएं?
छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ का आरोप है कि तहसीलों में कार्यरत अधिकारियों को मानवीय संसाधनों, तकनीकी सुविधाओं, सुरक्षा और सरकारी वाहनों की गंभीर कमी झेलनी पड़ रही है।
संघ का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद सरकार ने मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे असंतोष गहराता जा रहा है।
संघ का आंदोलन कार्यक्रम
- 21 से 26 जुलाई – निजी संसाधनों से सरकारी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार
- 28 जुलाई – जिला स्तर पर सामूहिक अवकाश और विरोध
- 29 जुलाई – संभाग और राज्य स्तर पर सामूहिक अवकाश
- 30 जुलाई – राजधानी रायपुर में धरना प्रदर्शन
- आगे समाधान न मिलने पर – अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की चेतावनी
मुख्य 17 सूत्रीय मांगों में शामिल हैं:
- सभी तहसीलों में स्वीकृत पदों पर तत्काल नियुक्ति
- तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद तक 50:50 पदोन्नति कोटा लागू करना
- नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित दर्जा देना
- ग्रेड पे में शीघ्र सुधार
- सभी तहसीलों में शासकीय वाहन या वाहन भत्ता देना
- बिना प्रक्रिया के निलंबित अधिकारियों की शीघ्र बहाली
- न्यायालयीन आदेशों पर FIR और मीडिया ट्रायल पर रोक
- तकनीकी काम के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति
- सभी अधिकारियों को सुरक्षा कर्मी और मोबाइल डिवाइस की सुविधा
क्या कहा संघ ने?
संघ के जिला अध्यक्ष प्रकाश चंद साहू ने कहा:
“हमने यह ज्ञापन कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री को भेजा है। यदि 26 जुलाई तक कोई ठोस पहल नहीं होती, तो हम बाध्य होकर आंदोलन करेंगे।”
प्रशासन पर दबाव बढ़ा
इस आंदोलन की चेतावनी के बाद राज्य शासन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। यदि तहसीलदार और नायब तहसीलदार कार्य का बहिष्कार करते हैं तो इससे राजस्व, भू-राजस्व प्रकरण, नामांतरण, जाति/निवास प्रमाण पत्र और अन्य प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।



