
19 अगस्त 2026 //
बिलासपुर न्यूज़ धमाका – CAG रिपोर्ट में बिलासपुर रेल जोन की पेयजल व्यवस्था सबसे खराब मिली है। 16 जोन में SECR का कमी स्कोर 93.35 रहा, रेलवे ने सुधार के निर्देश दिए।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर रेल जोन में यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पेयजल व्यवस्था के मामले में SECR का प्रदर्शन देश के 16 रेलवे जोन में सबसे खराब पाया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन में भी हलचल बढ़ गई है
पेयजल व्यवस्था में 93.35 का कमी स्कोर
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के 512 चयनित रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों की जांच की गई। इसमें दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का कमी स्कोर 93.35 दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कमी स्कोर जितना अधिक होता है, व्यवस्था उतनी ही खराब मानी जाती है। इसके मुकाबले दक्षिण मध्य रेलवे ने 17.53 के कमी स्कोर के साथ बेहतर प्रदर्शन किया। आंकड़ों की तुलना से साफ है कि पेयजल व्यवस्था के मामले में SECR को बड़े सुधार की जरूरत है।
यात्री सुविधाओं के मामले में भी पिछड़ा SECR
सिर्फ पेयजल ही नहीं, बल्कि यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली न्यूनतम सुविधाओं के मामले में भी दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का प्रदर्शन चिंताजनक रहा। इस श्रेणी में SECR का कमी स्कोर 106.6 रहा और जोन देश के 16 रेलवे जोन में अंतिम स्थान पर रहा। हालांकि दिव्यांग यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के मामले में SECR ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इस श्रेणी में जोन ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया और इसका कमी स्कोर 20.97 रहा।
CAG रिपोर्ट के बाद रेलवे ने दिए सुधार के निर्देश
CAG रिपोर्ट के सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। रेलवे की ओर से वाटर कूलरों समेत करीब 20 हजार स्थानों पर टैंक-टू-टैप जल फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही पानी की टंकियों की नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्रोत से आउटलेट तक होगी पानी की जांच
रेलवे अब पानी की गुणवत्ता की निगरानी केवल टंकी तक सीमित रखने के बजाय उसके स्रोत से लेकर यात्रियों को मिलने वाले आउटलेट तक करने की तैयारी में है। इसके लिए पानी के नमूनों की नियमित जांच और गुणवत्ता की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है। बोर्ड स्तर से इस पूरी व्यवस्था की निगरानी की जाएगी और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही भी तय करने की बात कही गई है।



