
30 जुलाई 2026 //
मोहला न्यूज़ धमाका – मोहला में कृषि भूमि की कथित अवैध प्लाटिंग और रजिस्ट्री का मामला चर्चा में। ग्रामीणों ने राजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए, तहसीलदार ने जांच के निर्देश दिए
छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के मुख्यालय मोहला में कृषि भूमि की कथित अवैध प्लाटिंग और रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिले में भू-माफिया राजस्व विभाग और उप पंजीयक कार्यालय की मिलीभगत से बिना डायवर्सन कराए कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लॉट में काटकर आवासीय भूखंड के रूप में बेच रहे हैं। इस पूरे मामले में शासन को राजस्व का नुकसान होने का भी दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार जिला बनने के बाद से मोहला भू-माफियाओं के लिए नया केंद्र बन गया है। इन दिनों जिला मुख्यालय से लगे ग्राम चिलमटोला में बड़े पैमाने पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। आरोप है कि सरकार के प्रतिबंध के बावजूद लगभग सात एकड़ से अधिक कृषि भूमि को बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) के छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर ऊंची कीमतों पर बेचा जा रहा है।

40 से अधिक टुकड़ों में बांटी गई कृषि भूमि
ग्रामीणों का आरोप है कि चिलमटोला में लगातार लगे पांच कृषि खसरों को 40 से अधिक भूखंडों में विभाजित कर उनकी रजिस्ट्री कराई जा रही है। आरोप यह भी है कि एक ही खसरा नंबर के कई हिस्से कर नामांतरण तक की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। इससे न केवल कॉलोनाइजर एक्ट और रेरा के नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी पहुंच रहा है।
भू-माफियाओं पर गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित भूमि मूल रूप से अफरोज खान, सजीदा बेगम, शहनाज बेगम, सायरा बेगम, हेमंत साहू और अन्य लोगों के नाम दर्ज है। दावा किया गया है कि इन जमीनों को खरीदने के बाद कुछ लोगों द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के प्लॉट काटकर बेचा जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में रेमंत देवांगन और हेमंत साहू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि रेमंत देवांगन पूर्व में जमीन से जुड़े एक मामले में जेल भी जा चुका है। हालांकि, इस संबंध में स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

राजस्व अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध प्लाटिंग के बावजूद संबंधित भूखंडों की रजिस्ट्री, नामांतरण और नक्शा विभाजन की प्रक्रिया आसानी से पूरी कराई जा रही है। उनका कहना है कि पटवारी स्तर पर भी मूल खसरों से उपखंडों का नक्शा काटा जा रहा है, जिससे पूरे मामले में राजस्व अमले की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
खरीदारों को नहीं मिल रहीं मूलभूत सुविधाएं
आरोप है कि खरीदारों को कॉलोनी विकसित करने का भरोसा देकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, लेकिन मौके पर केवल कच्ची सड़क बनाई गई है। बिजली, नाली, पार्क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है।
रेरा और कॉलोनाइजर एक्ट पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार जिले में कॉलोनाइजर एक्ट के तहत पंजीकृत कोई वैध कॉलोनाइजर नहीं है और न ही किसी आवासीय परियोजना का रेरा में पंजीयन हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि कोई परियोजना वैध रूप से पंजीकृत नहीं है, तो बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग और रजिस्ट्री कैसे हो रही है।
तहसीलदार ने जांच का दिया भरोसा
मामले पर मोहला तहसीलदार नेहा विश्वकर्मा ने कहा कि अवैध प्लाटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि अवैध प्लॉटों की रजिस्ट्री और नामांतरण रोकने के लिए पत्र जारी किया जाएगा तथा संबंधित पटवारियों से जानकारी ली जाएगी कि मोहला क्षेत्र में अब तक कितनी अवैध प्लाटिंग हुई है। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।