
रायपुर न्यूज धमाका – जब सपने बड़े हों और संसाधन छोटे, तब असली कहानी वहीं से शुरू होती है। छत्तीसगढ़ की बेटी शालू डहरिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है — संघर्षों की बुनियाद पर खड़ा एक सपना, जो आज चीन के सिआन में होने वाली एशिया यूथ सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप तक पहुंच चुका है।
12 बार राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी, अब एशिया में करेंगी देश का प्रतिनिधित्व
साधारण परिवार से आने वाली शालू के पिता एक निजी सुरक्षा गार्ड हैं, और माँ एक छोटे से ब्यूटी पार्लर का संचालन करती हैं। बावजूद इसके शालू ने आठवीं कक्षा से सॉफ्टबॉल खेलना शुरू किया और आज उनके नाम 12 राष्ट्रीय सहभागिताएं और एक गोल्ड मेडल दर्ज है।
1.70 लाख की बाधा बनी दीवार… फिर मिला ‘मुख्यमंत्री का साथ’
एशिया यूथ सॉफ्टबॉल चैंपियनशिप के लिए चयन तो हो गया, लेकिन 1.70 लाख रुपए की भागीदारी फीस इस सफलता की राह में बड़ी रुकावट बन गई। परिवार की आर्थिक स्थिति इस बोझ को उठाने की स्थिति में नहीं थी।
तभी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल ने सब कुछ बदल दिया। उन्होंने शालू को वीडियो कॉल कर न केवल बधाई दी, बल्कि सरकारी सहायता से पूरे 1.70 लाख रुपए की मदद भी प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा —
“बेटी, तुम आगे बढ़ो… हम सब तुम्हारे साथ हैं। छत्तीसगढ़ को तुम पर गर्व है। देश और प्रदेश का नाम रोशन करो।”
कलेक्टर ने सौंपी सहायता राशि, मां ने कहा – “मेरी बेटी अब उड़ान भरेगी”
मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांजगीर-चांपा कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने स्वयं शालू को सहायता राशि का चेक सौंपा, और प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर शालू की माँ अल्का डहरिया ने नम आंखों से कहा —
“सरकार की इस मदद से मेरी बेटी का सपना साकार हो रहा है। हम आभारी हैं।”
सिर्फ योजनाएं नहीं, हाथ थामने वाली सरकार
शालू की कहानी छत्तीसगढ़ सरकार की उस प्रतिबद्धता का उदाहरण है जो बेटियों को केवल ‘बेटी बचाओ’ तक नहीं, बल्कि ‘बेटी उड़ाओ’ तक ले जाती है। मुख्यमंत्री साय की यह पहल बताती है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, ज़रूरत के वक्त साथ खड़ी रहने वाली साथी भी है।
आप भी बन सकते हैं किसी “शालू” की प्रेरणा
शालू डहरिया की कहानी हम सबको यह संदेश देती है कि सपनों को कभी हालातों के हाथ न बेचिए, क्योंकि जब जज़्बा और समर्थन साथ हो, तो कोई भी मंच बड़ा नहीं होता। आज शालू सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।


