कोंडागांवछत्तीसगढ

चन्द्र शेखर देवांगन ….अभियंता दिवस…..ख्वाबों की दुनिया सच का संसार

कोंडागाव,न्यूज़ धमाका :- प्राचीन भारत में अभियंता या अभियांत्रिकी शब्द का विकास वास्तु या शिल्प शब्द से हुआ होगा। क्योंकि पौराणिक आख्यानों के अनुसार वास्तु/ शिल्प के जन्मदाता भगवान विश्वकर्मा को माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा को पृथ्वी का प्रथम वास्तुकार माना गया है। इंजिनियरिंग की सबसे पहली शाखा सिविल अभियांत्रिकी ही रही है।

वहीं आधुनिक युग में इंजीनियर शब्द लैटिन के शब्द इंजिनियेटर से लिया गया है जो कि लैटिन के ही दो शब्द इंजिनेयर अर्थात् “यंत्र अविष्कार” और इंजीनियम अर्थात् “चतुर” शब्द के मेल से बना है। अर्थात् इंजीनियर मतलब “चतुराई से यंत्रों का अविष्कार करने वाला”।
कहते हैं ईश्वर ने एकोअहं बहुस्याम एक से अनेक होने का सपना देखा और जगत जी रचना हुई। सारा संसार ही सपनों का खेल है।

जीव जगत में लाखों जीवों में केवल मानव होमो सेपियंस ही सपने देख सकता है। मनुष्य ने रात के अंधेरे में उजाले का सपना देखा तो बल्ब का अविष्कार हुआ, तीव्र गति से आवागमन का सपना तो देखा मोटर कार ट्रेन का अविष्कार का हुआ, उड़ने का सपना देखा तो हवाई जहाज का अविष्कार, पानी में मछली की तरह तैरने का सपना देखा तो पनडुब्बी का अविष्कार, दूर से बोलने सुनने का सपना देखा तो टेलीफोन का अविष्कार हुआ।

वास्तव में प्राचीन युग से आज तक के इंजीनियरिंग की समस्त नायाब रचना होमो सेपियंस की असंभव से पार जाने की जिद का नतीजा है।

समय के साथ यांत्रिकी की अनेकों शाखाएं हो गई हैं। परंतु मूल रूप से तीन शाखाएं ही प्रमुख हैं मैकेनिकल इलेक्ट्रिकल और सिविल। किसी जमाने में कृषि और व्यापार की तरक्की विभिन्न देशों की शक्ति का पैमाना हुआ करते थे तो पूंजीवाद के प्रादुर्भाव के साथ धन की शक्ति से देशों की शक्ति का आकलन होने लगा।

लेकिन आज का विश्व तकनीक का युग है। आज अमेरिका रूस चीन जापान जर्मनी इजरायल भारत तकनीकी शक्ति के आधार पर ही विश्व पर अपना प्रभाव रखते हैं। टेस्ला के एलन मस्क और फेसबुक के जुकरबर्ग का बहुत कम समय में ही चमत्कारिक रूप से शक्ति संपन्न हो जाना भी इंजीनियरिंग का ही चमत्कार है।

मानव संसार में तकनीक की पहली पाठशाला प्रकृति रही है। बया पक्षी का घोसला इंजिनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण है तो दीमक की बांबी की संरचना भी कम आश्चर्यजनक नही है खुले आसमान में भी बांबी के अंदर बरसात का पानी बाहर ही रह जाता है अंदर नही जा पाता। प्रकृति और मनुष्य में सबसे बड़ा फर्क ये रहा है कि प्रकृति केवल सृजनात्मक होती है और मनुष्य की रचना विनाशात्मक भी होती है।

हिरोशिमा नागाशकी पर परमाणु बम विस्फोट तकनीकी कामयाबी का भयानक अमानवीय उदाहरण है। वहीं तकनीकी तरक्की की अतिशयता में अब रूस ने पृथ्वी में सीधे आर पार जाने की विनाशक जिद में पृथ्वी में 12 किमी गहरा गड्ढा ही खोद डाला; तो चीन में निर्मित अति विशाल “थ्री गॉर्जेज बांध” से पृथ्वी का घूर्णन प्रभावित होने की आशंका है और चीन ने अब कृत्रिम सूर्य भी निर्मित कर लिए।

सिविल इंजीनियरिंग का सबसे पहला चमत्कारिक उदाहरण त्रेता युग का राम सेतु और केमिकल इंजीनियरिंग का सबसे पहला उदाहरण सतयुग का समुद्र अमृत मंथन है; आधुनिक युग की तुलना में अनेक क्षेत्रों में इतिहास में कहीं ज्यादा श्रेष्ठ तकनीकें थी।
अतीत की अनेकों टेक्नोलॉजी पुन: अज्ञात के गर्भ में समा गई हैं; सिंधु घाटी सभ्यता और दिल्ली की मेहरौली लौह स्तंभ की जंग रोधकता का कारण। तकनिकी ज्ञान को संस्थानों तक सीमित समझना मानव कुशलता को सीमित कर देने जैसा होगा।

इंजीनियरिंग की तीन मूल शाखाएं तरह हमारे देश में इंजीनियर की भी तीन कैटेगरी होती है टेक्नोक्रैट, इंजिनियर और मिस्त्री। हमारे देश में अकेडमिक शिक्षा को ही योग्यता और सम्मान का मापदंड मान लिया गया है और यही सोच और अधिक तकनीक कुशल बनने में हमारे आड़े आ रही है।

सैकड़ों अविष्कार करने वाले थॉमस अल्वा एडिसन ने स्कूली शिक्षा बिलकुल नहीं पाई तो माइकल फैराडे ने प्राथमिक शिक्षा और हेनरी फोर्ड ने तो हाई स्कूल से आगे शिक्षा नही पाई। हमारी रोजमर्रा की तकनीकी आवश्यकताओं में ओपन मार्केट के मिस्त्री किसी जादूगर की तरह होते हैं। तभी तो यूजीसी ओपन मार्केट के इन प्रैक्टिकल मिस्त्रियों को “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस” कहते हुए अपने तकनीकी सस्थानों में क्लास लेने आमंत्रित करने का प्लान कर रही है।

हम भारतीय आधुनिक भारत के नव सिरजनहार महानतम इंजीनियर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के वंशज हैं…हम सपने देखेंगे और… जायेंगे… असम्भव के पार…l

Chhattisgarh News Dhamaka Team

स्टेट हेेड छत्तीसगढ साधना प्लस न्यूज ( टाटा प्ले 1138 पर ) , चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // जिला उपाध्यक्ष प्रेस क्लब कोंडागांव ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता //

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